आधुनिक भारत का इतिहास (राष्ट्रीय आंदोलन): Indian Modern History Test Series JobAyog

Indian Modern History Test Series JobAyog आज भारत के राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न के रूप में टेस्ट सीरीज दिया गया है इसे जरूर एटेम्पट करें भारत में यूरोपीय शक्तियों का आगमन केवल व्यापार तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारत के इतिहास में एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आया।

15वीं शताब्दी के अंत में जब समुद्री मार्ग की खोज हुई, तब यूरोप और भारत के बीच सीधा संपर्क संभव हुआ। इससे पहले भारत और यूरोप के बीच व्यापार अरब और वेनिस के व्यापारियों के माध्यम से होता था। लेकिन नए समुद्री मार्ग ने इस पुराने सिस्टम को बदल दिया और एक नई शक्ति की शुरुआत हुई।

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Table of Contents

Discovery of Sea Route – समुद्री मार्ग की खोज और शुरुआत

1498 ई. में Vasco da Gama ने ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते भारत पहुँचकर इतिहास बदल दिया। वह कालीकट (आज का कोझिकोड) के तट पर पहुँचे, जहाँ स्थानीय शासक जमोरिन ने उनका स्वागत किया। यह घटना बहुत महत्वपूर्ण थी क्योंकि इससे यूरोप और भारत के बीच सीधा व्यापार शुरू हुआ।

इस खोज के बाद पुर्तगालियों ने भारत में अपनी शक्ति बढ़ानी शुरू की। उन्होंने समुद्र में अपनी नौसेना मजबूत की और व्यापारिक केंद्र स्थापित किए।

 

#1. गांधीजी के विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के आंदोलन का लक्ष्य था-

उत्तर-(d)

स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आंदोलन चलाया गया था।

#2. भारत को अधिकार क्षेत्र का दर्जा (डोमिनियन स्टेट्स) किस तारीख को मिला?

उत्तर-(b)

माउंटबेटन योजना के आधार पर ही 4 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतंत्रता विधेयक पेश किया गया तथा 18 जुलाई, 1947 को इसे स्वीकृति मिल गई। इसके अनुसार, देश को 15 अगस्त, 1947 को दो डोमिनियनों भारत और पाकिस्तान में बांट दिया जाएगा। इस प्रकार भारत को इसी तिथि को डोमिनियन स्टेट्स का दर्जा प्राप्त हो गया।

#3. किसकी विफलता के बाद ‘स्वराज पार्टी’ बनाई गई थी?

उत्तर-(a)

असहयोग आंदोलन की विफलता के बाद वर्ष 1923 में स्वराज पार्टी बनाई गई थी। इसके संस्थापक अध्यक्ष सी.आर. दास और महासचिव मोतीलाल नेहरू थे। इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य चुनावों के माध्यम से काउंसिलों में प्रवेश कर तथा उन्हें काम न करने देकर 1919 के भारत शासन अधिनियम का उच्छेदन करना था।

#4. लंदन में गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किसकी चर्चा के लिए किया गया था?

उत्तर-(b)

लंदन में गोलमेज सम्मेलन का आयोजन साइमन आयोग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर चर्चा करने के लिए किया गया था। इस चर्चा के द्वारा ब्रिटिश भारत के लिए भावी संविधान तैयार किया जाना था।

#5. 1927 में ब्रुसेल्स में दलित राष्ट्रवादियों की कांग्रेस में राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से किसने भाग लिया था?

उत्तर-(a)

वर्ष 1927 में ब्रुसेल्स में दलित राष्ट्रवादियों की कांग्रेस में राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से जवाहरलाल नेहरू ने भाग लिया था।

#6. कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष कौन थी?

उत्तर-(a)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष एनी बेसेंट थीं। उन्हें वर्ष 1917 में कलकत्ता में इस पद के लिए चुना गया था।

#7. बाल, पाल तथा लाल अत्यंत प्रमुख नेता थे-

उत्तर-(d)

बाल (बाल गंगाधर तिलक), पाल (बिपिन चंद्र पाल) तथा लाल (लाला लाजपत राय) कांग्रेस पार्टी के गरम दल के प्रमुख नेता थे।

#8. सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से निकलने के बाद किस पार्टी की स्थापना की थी?

उत्तर-(c)

सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन (1939) में गांधीजी से मतभेद होने के बाद फारवर्ड ब्लॉक पार्टी की स्थापना की थी।

#9. निम्नलिखित में से किसने आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी?

उत्तर-(b)

आजाद हिंद फौज का गठन 4 जुलाई, 1943 को सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में किया गया था। फौज का गठन सिंगापुर द्वीप पर किया गया था।

#10. 12 अप्रैल, 1944 को सुभाष चंद्र बोस ने एक नगर में ‘भारतीय राष्ट्रीय सेना’ का झंडा फहराया था। वह नगर इस समय किस राज्य केंद्र शासित प्रदेश में है?

उत्तर-(c)

भारत की मुख्य भूमि पर सर्वप्रथम भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) द्वारा मोइरांग (Moirang) नगर में कर्नल शौकतउल्ला मलिक द्वारा 14 अप्रैल, 1944 में अपना झंडा फहराया गया था। यह नगर वर्तमान में मणिपुर राज्य में स्थित है।

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Portuguese Power in India – भारत में पुर्तगाली शक्ति

भारत में पुर्तगालियों की असली ताकत अल्फांसो द अल्बुकर्क के समय में बढ़ी। उसने 1510 ई. में गोवा पर कब्जा किया और उसे अपना मुख्य केंद्र बनाया। गोवा आगे चलकर पुर्तगालियों की राजधानी बन गया।

पुर्तगालियों का उद्देश्य केवल व्यापार करना नहीं था, बल्कि वे समुद्री मार्गों पर पूरा नियंत्रण चाहते थे। उन्होंने कई महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जा कर लिया और हिंद महासागर में अपनी मजबूत स्थिति बना ली।

Arrival of Dutch and British – डच और अंग्रेजों का आगमन

पुर्तगालियों की सफलता देखकर अन्य यूरोपीय देश भी भारत आए। डच और अंग्रेजों ने 17वीं शताब्दी में भारत में अपने व्यापारिक केंद्र स्थापित किए।

अंग्रेज 1608 ई. में सूरत पहुँचे। बाद में उन्होंने मद्रास, बंबई और कलकत्ता जैसे स्थानों पर अपने केंद्र बनाए। अंग्रेजों ने धीरे-धीरे व्यापार के साथ-साथ राजनीति में भी दखल देना शुरू किया।

Fortification and Political Control – किलेबंदी और राजनीतिक नियंत्रण

अंग्रेजों ने अपने व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा के लिए किले बनाए। कलकत्ता में उन्होंने फोर्ट विलियम का निर्माण किया। यह केवल सुरक्षा के लिए नहीं था, बल्कि यह राजनीतिक शक्ति का प्रतीक भी था।

जब मुगल साम्राज्य कमजोर होने लगा, तब अंग्रेजों ने इस स्थिति का फायदा उठाया। उन्होंने स्थानीय शासकों के साथ संधियाँ कीं और धीरे-धीरे अपना नियंत्रण बढ़ाया।

Economic Exploitation – आर्थिक शोषण की शुरुआत

अंग्रेजों के शासन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया। पहले भारत तैयार माल (जैसे कपड़ा) का निर्यात करता था, लेकिन बाद में वह कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता बन गया।

किसानों को मजबूर किया गया कि वे अपनी जरूरत की फसलें छोड़कर अंग्रेजों की मांग के अनुसार फसल उगाएँ।

  • बंगाल में जूट
  • असम में चाय
  • महाराष्ट्र और पंजाब में कपास
  • उत्तर प्रदेश में गन्ना

इससे किसानों की स्थिति खराब हो गई। वे कर्ज और गरीबी में फँस गए।

Impact on Indian Society – भारतीय समाज पर प्रभाव

यूरोपीय व्यापारिक कंपनियाँ धीरे-धीरे शासक बन गईं। व्यापार से शुरू हुआ सफर राजनीतिक नियंत्रण और आर्थिक शोषण तक पहुँच गया। इससे भारत की पारंपरिक अर्थव्यवस्था कमजोर हुई और देश एक औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में बदल गया।

हालाँकि इस दौर में कुछ आधुनिक बदलाव भी आए, जैसे नए समुद्री मार्ग, नई तकनीक और वैश्विक संपर्क, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान भारतीय किसानों और कारीगरों को हुआ।

Conclusion: Indian Modern History Test Series JobAyog

यूरोपीय औपनिवेशिक विस्तार केवल व्यापार की कहानी नहीं है, बल्कि यह शक्ति, राजनीति और आर्थिक नियंत्रण की कहानी है। समुद्री मार्ग की खोज से शुरू हुई यह यात्रा भारत को एक समृद्ध व्यापारिक राष्ट्र से एक औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में बदलने तक पहुँच गई। यह इतिहास हमें सिखाता है कि व्यापार और राजनीति जब साथ चलते हैं, तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।

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