One Shot Modern Indian History नमस्कार आज आधुनिक भारत के इतिहास में आप सभी के लिए इसका नोट्स प्रदान किया गया है जो आपको नीचे पीएफ के रूप में प्राप्त हो जाएंगे Modern Indian History का यह दौर भारत के लिए बहुत बड़ा turning point था।
इस समय Mughal Empire धीरे-धीरे कमजोर हुआ और उसी कमजोरी का फायदा उठाकर European Powers in India ने अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दीं। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि कई सालों तक चली गलत नीतियों, कमजोर शासकों और अंदरूनी संघर्षों का नतीजा था।
Decline of Mughal Empire (1707–1857)
1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य की ताकत कम होने लगी। उत्तराधिकार के झगड़े, inefficient administration और economic problems ने शासन को कमजोर कर दिया। नए मुगल सम्राट जनता और nobles दोनों का भरोसा बनाए रखने में असफल रहे।
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जब किसी organization में strong leader चला जाता है और management कमजोर हो जाए, तो पूरा system धीरे-धीरे टूटने लगता है। Mughal Empire के साथ भी यही हुआ।
Weak Mughal Rulers and Court Politics
Bahadur Shah I और Jahandar Shah जैसे शासक मजबूत निर्णय नहीं ले पाए। असली सत्ता ministers और court politics के हाथ में चली गई। इस दौरान Sayyid Brothers ने emperors को बनाना और हटाना शुरू किया, इसलिए उन्हें King Makers कहा गया।
इसी समय British East India Company को trade benefits मिले, जिससे अंग्रेजों को Indian market में बड़ा advantage मिला। यह privilege आगे चलकर British rule की नींव बना।
Nadir Shah’s Attack and Loss of Mughal Power
Muhammad Shah Rangila के समय luxury life और entertainment पर ज्यादा ध्यान दिया गया। 1739 में Nadir Shah ने Delhi पर हमला किया और भारी लूट की। इस हमले ने साफ कर दिया कि Mughal Empire अब India की रक्षा करने की स्थिति में नहीं है।
इस घटना के बाद Mughal emperor केवल नाम के ruler रह गए।
Rise of Regional States in India
Mughal decline के बाद कई regional states उभरे जैसे Awadh, Bengal, Hyderabad और Bharatpur। ये राज्य बाहर से Mughal emperor को मानते थे लेकिन अंदर से पूरी तरह independent थे।
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जब central authority कमजोर होती है, तो local leaders खुद decisions लेने लगते हैं। यही स्थिति उस समय भारत में बनी।
Arrival of European Trading Companies
भारत की wealth और resources ने European traders को आकर्षित किया। Portuguese, Dutch, French और British सभी trade के लिए India आए। शुरुआत में ये companies व्यापार तक सीमित थीं, लेकिन धीरे-धीरे political control की ओर बढ़ने लगीं।
इन सभी में British East India Company सबसे ज्यादा organized और strategic साबित हुई।
Growth of British East India Company
British company ने Indian rulers की आपसी लड़ाइयों का फायदा उठाया। Trade permissions, military strength और diplomacy के जरिए उन्होंने Bombay, Calcutta और Madras जैसे strong centers बनाए।
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जैसे कोई company market की कमजोरी देखकर monopoly बना लेती है, वैसे ही British company ने India में power हासिल की।
Carnatic Wars: British vs French
British और French के बीच supremacy के लिए तीन Carnatic Wars हुए। इन wars में British army की planning और leadership बेहतर साबित हुई।
1760 की Battle of Wandiwash और 1763 की Treaty of Paris के बाद French influence लगभग खत्म हो गया। इसके बाद India में British power को कोई बड़ी European challenge नहीं मिला।
End of Mughal Empire and British Rule
1857 की Revolt के समय Bahadur Shah Zafar अंतिम Mughal emperor थे। Revolt के असफल होने के बाद Mughal Empire पूरी तरह समाप्त हो गया और British Colonial Rule in India की शुरुआत हुई।
Mughal Empire का पतन और European powers का उदय एक connected process था। कमजोर leadership, internal conflicts और strong foreign strategy ने India को British rule की ओर धकेल दिया। यही कारण है कि यह topic Modern Indian History Notes, UPSC, SSC और Competitive Exams के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
18वीं और 19वीं शताब्दी का समय भारतीय इतिहास में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुगल साम्राज्य कमजोर हो चुका था और देश में एक तरह का political vacuum बन गया था। इसी खाली जगह में कुछ शक्तिशाली regional states उभरे और साथ ही British East India Company ने धीरे-धीरे अपना प्रभुत्व बढ़ाना शुरू किया। यही दौर आगे चलकर ब्रिटिश राज की नींव बना।
बंगाल अंग्रेजों की सत्ता की पहली सीढ़ी One Shot Modern Indian History
बंगाल उस समय भारत का सबसे अमीर और उपजाऊ प्रांत था। खेती, व्यापार और उद्योग के कारण इसे “भारत का स्वर्ग” भी कहा जाता था। मुगल शासन कमजोर पड़ते ही मुर्शिद कुली खाँ ने यहाँ एक मजबूत प्रशासन खड़ा किया और बंगाल को लगभग स्वतंत्र बना दिया।
उन्होंने राजधानी ढाका से हटाकर मुर्शिदाबाद कर दी और राजस्व व्यवस्था को बेहतर बनाया। किसानों को तकावी ऋण दिया गया, जिससे खेती को बढ़ावा मिला। बाद में अलीवर्दी खाँ ने भी बंगाल को इतना समृद्ध बना दिया कि मुगल बादशाह को कर देना लगभग बंद हो गया।
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जैसे कोई राज्य केंद्र सरकार पर कम निर्भर होकर खुद आर्थिक रूप से मजबूत हो जाए, वैसा ही बंगाल उस समय बन चुका था।
सिराजुद्दौला और अंग्रेजों से टकराव
अलीवर्दी खाँ के बाद सिराजुद्दौला नवाब बने। वे अंग्रेजों की बढ़ती ताकत से खुश नहीं थे। 1756 में हुई Black Hole Tragedy की घटना को अंग्रेजों ने अपने खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाया और इसी बहाने बंगाल पर सीधा हमला किया।
यह घटना असल में अंग्रेजों के लिए युद्ध का एक excuse बन गई।
प्लासी और बक्सर के युद्ध
1757 में प्लासी का युद्ध लड़ा गया, जिसमें सिराजुद्दौला की हार हुई। इसका सबसे बड़ा कारण था मीर जाफर का विश्वासघात। यह युद्ध दिखाता है कि केवल सेना ही नहीं, बल्कि राजनीति और साजिश भी इतिहास बदल देती है।
इसके बाद 1764 का बक्सर युद्ध और भी महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसमें अंग्रेजों ने बंगाल, अवध और मुगल बादशाह की संयुक्त सेना को हरा दिया। इस जीत के बाद अंग्रेज भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बन गए।
Simple समझिए:
प्लासी ने रास्ता खोला और बक्सर ने अंग्रेजों को स्थायी ताकत दे दी।
मैसूर हैदर अली और टीपू सुल्तान का संघर्ष
दक्षिण भारत में मैसूर ने अंग्रेजों को सबसे कड़ी चुनौती दी। हैदर अली और उनके पुत्र टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लगातार संघर्ष किया।
टीपू सुल्तान आधुनिक सोच वाले शासक थे। वे फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित थे, अपनी सेना और प्रशासन में सुधार किए और विदेशी ताकतों से मुकाबला किया। उन्हें “शेर-ए-मैसूर” कहा जाता था।
चार आंग्ल-मैसूर युद्ध हुए और 1799 में चौथे युद्ध के दौरान टीपू सुल्तान शहीद हो गए। इसके बाद दक्षिण भारत में अंग्रेजों का रास्ता साफ हो गया।
सिख धर्म और सैन्य शक्ति का विकास
सिख धर्म की शुरुआत गुरु नानक देव जी ने की, जिनका संदेश था समानता और भाईचारा। धीरे-धीरे सिख समुदाय केवल धार्मिक नहीं बल्कि एक military power भी बना।
गुरु गोविंद सिंह ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की और सिखों को संगठित किया। इसके बाद बंदा बहादुर ने पंजाब में सिख शासन स्थापित करने की कोशिश की और जमीन किसानों में बाँटी।
महाराजा रणजीत सिंह और सिख साम्राज्य
महाराजा रणजीत सिंह ने एक मजबूत और संगठित सिख राज्य बनाया, जिसकी राजधानी लाहौर थी। उनका प्रशासन धर्मनिरपेक्ष था और हिंदू, मुस्लिम व सिख सभी ऊँचे पदों पर थे।
1809 में अंग्रेजों से अमृतसर की संधि हुई, जिससे कुछ समय तक शांति बनी रही। लेकिन 1839 में रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद सिख राज्य कमजोर हो गया। दो आंग्ल-सिख युद्धों के बाद 1849 में अंग्रेजों ने पंजाब को अपने साम्राज्य में मिला लिया।
सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन
ब्रिटिश शासन के दौरान पंजाब में कई सुधार आंदोलन भी चले।
- सिंह सभा आंदोलन: सिख धर्म को शुद्ध रूप में वापस लाने के लिए
- कूका और नामधारी आंदोलन: अंग्रेजों के खिलाफ और सामाजिक बुराइयों के विरोध में
- इन आंदोलनों ने समाज में जागरूकता और आत्मसम्मान बढ़ाया
कंपनी शासन और गवर्नर-जनरल के सुधार
रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल में Dual Government लागू की, जिससे कंपनी को असली सत्ता मिल गई और नवाब केवल नाम के शासक रह गए।
इसके बाद वारेन हेस्टिंग्स ने प्रशासनिक और न्यायिक सुधार किए। अदालतों की स्थापना हुई, कानून व्यवस्थित हुए और ब्रिटिश शासन को एक मजबूत ढांचा मिला।
निष्कर्ष
मुगल साम्राज्य के पतन के बाद उभरी क्षेत्रीय शक्तियाँ—बंगाल, मैसूर और पंजाब—शुरुआत में मजबूत थीं, लेकिन आपसी संघर्ष और अंग्रेजों की कूटनीति के सामने टिक नहीं सकीं। धीरे-धीरे British East India Company ने पूरे भारत पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और आधुनिक भारत के इतिहास में ब्रिटिश राज का अध्याय शुरू हुआ।
