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8वीं से 12वीं शताब्दी का समय भारत के इतिहास में एक बड़ा Turning Point माना जाता है। इसी काल में भारत पर अरब और तुर्क आक्रमण हुए, जिनके कारण भारतीय राजनीति, समाज और संस्कृति में बड़े बदलाव आए।
मध्यकालीन भारत की पृष्ठभूमि (Background of Medieval India)
8वीं शताब्दी तक भारत में कई छोटे-छोटे राज्य थे। कोई मजबूत केंद्रीय सत्ता नहीं थी।
इसका फायदा बाहरी शक्तियों ने उठाया।
विदेशी आक्रमणों के दो मुख्य चरण रहे:
- पहला चरण: अरबों के आक्रमण
- दूसरा चरण: तुर्कों के आक्रमण
अरबों का प्रभाव सीमित रहा, लेकिन तुर्कों ने भारत में स्थायी शासन की नींव रखी।
भारत में अरबों का आक्रमण (Arab Invasion in India)
अरबों का भारत से संपर्क सबसे पहले व्यापार के माध्यम से हुआ।
लेकिन बाद में यह संपर्क सैन्य आक्रमण में बदल गया।
सिंध क्यों बना पहला लक्ष्य?
- सिंध भारत का पश्चिमी द्वार था
- समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र
- अरबों के लिए रणनीतिक (Strategic) स्थान
प्रथम मुस्लिम आक्रमणकारी
भारत में पहला सफल मुस्लिम आक्रमणकारी था:
- मुहम्मद बिन कासिम
महत्वपूर्ण तथ्य
- वर्ष: 712 ईस्वी
- क्षेत्र: सिंध
- युद्ध: रावर का युद्ध
- पराजित शासक: राजा दाहिर
यह भारत में मुस्लिम सत्ता की पहली स्थायी स्थापना मानी जाती है।
उदाहरण
जैसे किसी घर का दरवाज़ा खुल जाए, तो अंदर जाना आसान हो जाता है—
वैसे ही सिंध पर विजय ने भविष्य के आक्रमणकारियों के लिए रास्ता खोल दिया।
अरब आक्रमणों का प्रभाव
- अरबों का शासन सीमित क्षेत्र तक ही रहा
- भारतीय संस्कृति पर गहरा प्रभाव नहीं पड़ा
- लेकिन भारत की कमजोर राजनीतिक स्थिति उजागर हो गई
यही कमजोरी आगे चलकर तुर्क आक्रमणों का कारण बनी।
तुर्क आक्रमणों की शुरुआत (Turkish Invasions)
10वीं शताब्दी के अंत में भारत पर तुर्कों के आक्रमण शुरू हुए।
ये आक्रमण अरबों की तुलना में अधिक आक्रामक और संगठित थे।
गजनी वंश और महमूद गजनवी
गजनी वंश की स्थापना
- संस्थापक: अल्पतगीन
- पहला तुर्क आक्रमणकारी: सुबुक्तगीन
- सबसे प्रसिद्ध शासक: महमूद गजनवी
महमूद गजनवी का शासन
- शासनकाल: 998 ई. – 1030 ई.
- भारत पर कुल आक्रमण: 17 बार
- उद्देश्य: धन लूटना, न कि शासन करना
इसी कारण उसे एक लुटेरा शासक (Plunderer) कहा जाता है।
महमूद गजनवी के प्रमुख आक्रमण
पहला आक्रमण (1001 ई.)
- शत्रु: राजा जयपाल
- परिणाम: जयपाल की हार
सोमनाथ मंदिर आक्रमण (1025–26 ई.)
- यह महमूद का 16वां आक्रमण था
- शासक: भीम प्रथम
- मंदिर को भारी नुकसान हुआ
- अपार धन की लूट
उदाहरण
महमूद के आक्रमण ऐसे थे जैसे कोई बार-बार बैंक लूटने आए, लेकिन बैंक पर कब्ज़ा न करे।
गजनी काल के प्रमुख विद्वान
महमूद के दरबार में कई महान विद्वान थे जिन्होंने इतिहास लिखा।
- उत्बी – किताब-उल-यामिनी
- फिरदौसी – शाहनामा
- अलबरूनी – तहकीक-ए-हिन्द
अलबरूनी ने भारत की संस्कृति, समाज और धर्म का निष्पक्ष वर्णन किया।
मुहम्मद गोरी का उदय
महमूद गजनवी के बाद भारत में तुर्क प्रभाव का दूसरा और निर्णायक चरण शुरू हुआ।
मुहम्मद गोरी की विशेषता
- उद्देश्य: भारत में स्थायी साम्राज्य बनाना
- सत्ता संभाली: 1173 ई.
- क्षेत्र: गोर (अफगानिस्तान)
गोरी के प्रमुख सैन्य अभियान
प्रारंभिक आक्रमण
- 1175 ई.: मुल्तान और कच्छ पर विजय
पहली हार (1178 ई.)
- पाटन का युद्ध
- शासक: भीम द्वितीय
- गोरी की भारत में पहली हार
तराइन के युद्ध: भारत का भाग्य बदलने वाले युद्ध
तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.)
- विजेता: पृथ्वीराज चौहान
- गोरी की हार
तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.)
- विजेता: मुहम्मद गोरी
- परिणाम: दिल्ली में तुर्क शासन की नींव
चंदावर का युद्ध (1194 ई.)
- पराजित शासक: जयचंद
- कन्नौज पर अधिकार
गोरी के दास और सत्ता का विस्तार
गोरी ने शासन को मजबूत करने के लिए अपने भरोसेमंद दासों को जिम्मेदारी सौंपी।
- कुतुबुद्दीन ऐबक – दिल्ली और लाहौर
- ताजुद्दीन याल्दोज – गजनी
- नासिरुद्दीन कुबाचा – मुल्तान
- बख्तियार खिलजी – बंगाल और बिहार
1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की।
सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभाव
गोरी के साथ भारत में सूफी संत भी आए।
- शेख मोइनुद्दीन चिश्ती
- चिश्ती संप्रदाय की स्थापना
- प्रेम, सेवा और मानवता का संदेश
इससे भारत में सांस्कृतिक समन्वय बढ़ा।
निष्कर्ष (Conclusion)
8वीं से 12वीं शताब्दी के बीच हुए अरब और तुर्क आक्रमणों ने भारत के इतिहास की दिशा बदल दी।
इन आक्रमणों ने:
- प्राचीन राजतंत्र को कमजोर किया
- मध्यकालीन शासन की नींव रखी
- 1206 ई. में दिल्ली सल्तनत की स्थापना संभव की
यह काल संघर्ष का भी था और परिवर्तन का भी।

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